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Bihar News: कोसी-गंडक परियोजनाओं पर भारत-नेपाल की बड़ी सहमति, बाढ़ नियंत्रण और अतिक्रमण हटाने पर संयुक्त कार्रवाई

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भारत-नेपाल बैठक में कोसी और गंडक परियोजनाओं को लेकर अहम फैसले हुए। बाढ़ नियंत्रण, अतिक्रमण हटाने और तकनीकी समस्याओं के समाधान पर सहमति बनी, जिससे बिहार को राहत मिलने की उम्मीद है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में हर साल बाढ़ से होने वाली भारी तबाही को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है, जहां कोसी और गंडक नदियों से जुड़े जटिल मुद्दों के समाधान के लिए भारत और नेपाल के बीच उच्चस्तरीय बैठक में कई अहम फैसलों पर सहमति बनी है, जिससे आने वाले समय में राज्य को बाढ़ की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, यह बैठक नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों के अधिकारियों ने लंबे समय से लंबित तकनीकी, प्रशासनिक और क्षेत्रीय विवादों पर विस्तार से चर्चा की और साझा समाधान निकालने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने किया, जबकि नेपाल की ओर से जल संसाधन और सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारी शामिल हुए, दोनों पक्षों ने कोसी और गंडक परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया और इस बात पर जोर दिया कि बाढ़ नियंत्रण, जल प्रबंधन और संरचनाओं के रखरखाव के लिए आपसी समन्वय को और मजबूत किया जाना आवश्यक है, क्योंकि इन नदियों का प्रभाव दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों पर पड़ता है और किसी एक पक्ष की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती।

बैठक के दौरान पश्चिमी कोसी मुख्य नहर के नेपाल क्षेत्र में पड़ने वाले हिस्से को दुरुस्त करने और वहां चल रहे कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने पर सहमति बनी, इसके साथ ही कोसी बराज और उससे जुड़े पूर्वी एवं पश्चिमी तटबंधों को अतिक्रमण से मुक्त कराने का भी निर्णय लिया गया, यह मुद्दा लंबे समय से दोनों देशों के बीच चिंता का विषय बना हुआ था क्योंकि अतिक्रमण के कारण बाढ़ नियंत्रण कार्य प्रभावित हो रहे थे और जल प्रवाह में भी बाधा उत्पन्न हो रही थी, अब संयुक्त कार्रवाई से इन समस्याओं को दूर करने की दिशा में ठोस पहल होगी।

गंडक परियोजना के तहत वाल्मीकिनगर क्षेत्र में स्थित बराज के आसपास भी अतिक्रमण हटाने और संरचनात्मक सुधार करने पर सहमति बनी है, जिससे जल निकासी की क्षमता बढ़ेगी और बाढ़ के दौरान पानी के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, इसके अलावा पश्चिमी कोसी नहर के बांध पर लगे बिजली के खंभों को हटाने का फैसला भी लिया गया है, क्योंकि ये खंभे मरम्मत और रखरखाव कार्यों में बाधा बन रहे थे और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता था।

बैठक में तकनीकी स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें कोसी परियोजना की लीज पर दी गई भूमि का सीमांकन आधुनिक जीपीएस तकनीक के माध्यम से तय समय सीमा के भीतर पूरा करना शामिल है, इससे भविष्य में भूमि विवादों को रोकने में मदद मिलेगी और परियोजना से जुड़े कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया जा सकेगा, इसके साथ ही कोसी वनटप्पू क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्यों के लिए निर्माण सामग्री और मशीनरी के आवागमन को 24 घंटे की अनुमति देने का निर्णय भी लिया गया है, जिससे आपात स्थिति में कार्यों को बिना किसी रुकावट के किया जा सकेगा।

एक अन्य अहम मुद्दा कोसी बराज पर यातायात को लेकर भी उठा, जहां भारी वाहनों की आवाजाही और अनियंत्रित गति से संरचना पर दबाव पड़ता है, इस पर दोनों देशों ने सहमति जताई कि वाहनों की गति को नियंत्रित किया जाएगा ताकि बराज की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, इसके अलावा बाढ़ के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा मछली पकड़ने या लकड़ी निकालने जैसी गतिविधियों से भी संचालन में बाधा आती है, इस पर नेपाल की ओर से आश्वासन दिया गया कि ऐसे कार्यों पर नियंत्रण रखा जाएगा।

बैठक में यह भी सामने आया कि नेपाल के कुछ स्थानीय निकायों द्वारा कोसी परियोजना से जुड़े वाहनों पर कर लगाया जा रहा है, जिसे द्विपक्षीय समझौते के विपरीत माना गया, इस मुद्दे पर सहमति बनी कि ऐसे करों को समाप्त किया जाएगा ताकि परियोजना से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए और दोनों देशों के बीच सहयोग की भावना बनी रहे।

जलजमाव की समस्या को लेकर भी दोनों देशों ने संयुक्त निरीक्षण करने का निर्णय लिया है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें, यह कदम खासतौर पर उन इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है जहां हर साल जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और खेती-बाड़ी भी प्रभावित होती है।

कुल मिलाकर यह बैठक बिहार के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि कोसी और गंडक नदियां राज्य में बाढ़ की सबसे बड़ी वजहों में शामिल हैं और हर साल लाखों लोग इससे प्रभावित होते हैं, ऐसे में भारत और नेपाल के बीच इस तरह का समन्वय और साझा निर्णय भविष्य में बाढ़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकता है, हालांकि इन फैसलों को जमीन पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती होगी और इसके लिए दोनों देशों को लगातार सहयोग और निगरानी बनाए रखनी होगी।

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